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सामाजिक विकास
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, ग्रामीण आबादी और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, जिसमें समाज के वंचित खंड के लाभ के लिए जैव प्रौद्योगिकी प्रक्रियाओं और उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का लक्ष्यख लक्षित जनसंख्या के बीच स्व-रोजगार के सृजन के लिए मंच बनाना और प्रदर्शन, प्रशिक्षण और विस्तार गतिविधियों के माध्यम से और सिद्ध क्षेत्र परीक्षण प्रौद्योगिकियों का प्रसार करना है।

फोकस के क्षेत्र हैं

  • Agriculture and Allied Sector
  • Health, Nutrition & Sanitation
  • Value Chain and Post Harvest
  • Agripreneurship Development
  • Biodiversity conservation
  • Rehabilitation and Restoration
  • measures for Natural Calamity

अब तक बड़ी संख्याम में महिलाओं, ग्रामीण आबादी और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों को इन कार्यक्रमों के कार्यान्व‍यन से लाभ मिला है। नवाचारी सामाजिक कार्यक्रम के उत्कृजष्ट उदाहरणों में से एक है ”प्रसाद किट पर नेटवर्क परियोजना’ और किसानों के लिए यह चलते फिरते एंबुलेटरी क्लिनिक चलाता है। नर्सरी में पौध रोपण की सामग्री तैयार करने के लिए सात एसएयू में ग्रामीण जैव संसाधन कॉम्लेा क्से के कार्यान्वणयन के साथ औषधीय तथा सुगंधित पौधों के संवर्धन हेतु अल्प लागत पॉलीहाउस निर्माण किए गए हैं। सुनामी के पीडि़तों के पुनर्वास का एक कार्यक्रम भी चलाया गया है, जहां तटीय मछुआरा समुदाय के लोगों को बड़ी संख्याो में परियोजनाओं द्वारा समर्थन दिया गया है। अन्य दो नई परियोजनाओं द्वारा उत्तराखण्डस में पुनर्वास कार्यक्रम के भाग के रूप में अचानक आई बाढ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत के लिए समर्थन दिया गया है।

हाल ही में एक नई पहल स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला समुदाय के संदर्भ में पोषण मुद्दों से संबंधित परियोजनाओं को समर्थन दिया गया था।

कार्यक्रम की उत्पत्ति

सामाजिक विकास के लिए समाज के कमजोर वर्गों विशेष रूप से किसानों, महिलाओं और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के लाभ के लिए जैव प्रौद्योगिकी आधारित कार्यक्रम 1990 में शुरू किया गया था। इन कार्यक्रमों में क्षेत्र प्रदर्शनों, प्रशिक्षण, शिक्षा अभियान आदि जैसे विभिन्न साधनों के माध्यम से दूर दराज तक पहुंचने के लिए एक दृष्टिकोण के साथ सिद्ध और क्षेत्र परीक्षण किया हस्तक्षेप के प्रसार पर बल दिया गया था। ये कार्यक्रम विभाग के वित्त पोषण तंत्र के साथ किए गए थे। ये समितियां इन लक्षित समूहों के लिए कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के हस्तक्षेप और संबद्ध क्षेत्र, स्वास्थ्य और स्वच्छता, पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन, एकीकृत कृषि, उत्पाद / प्रक्रिया विकास और मूल्य संवर्धन आदि के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने पर लक्षित हैं।

12 वीं योजना अवधि के दौरान कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए कार्यनीति

इन कार्यक्रमों को सरकारी एजेंसियों / गैर सरकारी संगठनों / संस्थाओं / विश्वविद्यालयों के लिए चुने गए क्षेत्रों में समर्थित परियोजनाओं के रूप में लागू किया जा रहा है। कुछ प्रमुख परियोजनाओं को गांवों के बड़े क्लस्टर आदि में स्थानीय जैव संसाधन, ग्रामीण व्य वस्था में कैंसर छानबीन, नेटवर्क परियोजनाओं के उपयोग पर भी समर्थन दिए गए हैं। अधिक उपज देने वाली किस्मों से बेहतर उत्पादकता और उत्पादन, जैव कीटनाशकों और जैव उर्वरकों के उपयोग एवं समाज के सभी वर्गों के लिए और भी सस्ती स्वास्थ्य देखभाल पर प्रचार-प्रसार के माध्यम से सतत विकास पर परियोजनाओं में कार्य शुरू होने की संभावना है। परियोजनाओं को पूरे वर्ष डीबीटी समर्थन के जरिए वित्त पोषण विचार के लिए स्वीकार किया जाता है। कभी कभार विशिष्ट विषय के आधार पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अवधारणाओं / रुचि के पत्र को भी बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

निगरानी और सलाह

विशेष कार्य दल समितियां और ईएसएससीएस (बाहरी स्थायी सह छानबीन समितियां) भी इन कार्यक्रमों का मूल्यांकन, निगरानी और संरक्षण करती हैं। विभाग द्वारा प्राप्त प्रस्तावों के मूल्यांकन के लिए इन समितियों की बैठक एक वर्ष में दो बार / तीन बार की जाती है। कार्य दल और उच्च अधिकार प्राप्तज समितियां इन कार्यक्रमों के अंतर्गत और नए क्षेत्रों की पहचान करने के लिए भी समर्थित परियोजनाओं की प्रगति के लिए कार्यक्रम का विस्तार करने की समीक्षा करती हैं।

इन कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से कुछ इस प्रकार हैं:

डीबीटी में प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए संगठनों के लिए दिशा-निर्देश

संपर्क पता:
डॉ ए.एस. निनावे
वैज्ञानिक ‘जी’ / सलाहकार
टेलीफोन:011-24363501;
ईमेल: ninawe[dot]dbt[at]nic[dot]in

डॉ एस यू अहमद,
वैज्ञानिक ‘सी’
टेलीफोन: 011-24363501
ईमेल: shahaj[dot]ahmed[at]nic[dot]in