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छात्रो का पन्ना

कुछ के लिए, जैव प्रौद्योगिकी एक ऐसा क्षेत्र है जो विस्तार के अवसरों को खोलता है और शेष के लिए यह एक जीवन का मिशन है!

आइए छात्रों, अनुसंधानकर्ताओं और अध्यासपकों की बातें सुनें कि उन्हें इस विषय के साथ कैसे लगाव हो गया और डीबीटी के साथ जुड़ गए

vanita नाम: वनिता लिंगदोह
शिक्षा: बीएससी तीसरा वर्ष (जैव प्रौद्योगिकी ऑनर्स)
बायोटैक्नोलॉजी विभाग, सेंट एडमंड कॉलेज
शिलांग, मेघालय

जैव प्रौद्योगिकी से हमें शैक्षिक, अनुसंधान और अनेक उद्योगों के क्षेत्र में कैरियर के अवसरों की एक व्यापपक रेंज मिलती है। यह हमें जीव विज्ञान की महत्वयपूर्ण संकल्पकनाओं से गुजरने का मार्ग दर्शन देती है और हम जीवन के महत्वंपूर्ण प्रश्नोंग के उत्तर खोजने का नेतृत्वण प्रदान करती है। चूंकि मुझे जीवन विज्ञान में आधुनिकतम विकास के बारे में सीखने की गहरी दिलचस्पीत थी इसलिए मैंने इस विषय को पढ़ने का मन बनाया।

Dheepthi. J नाम: दीप्ति. जे
शिक्षा: बीएससी तीसरा वर्ष (पशु प्राणी विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी)
महिला पीएसजीआर क्रिश्नाम्मल कॉलेज, कोयंबटूर,
तमिलनाडु

जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान की एक अंतर विषयक शाखा है जो तेजी से अपना महत्वै बढ़ा रही है। यह युवाओं के मन को खोलने का अवसर देती है जो जीवन विज्ञान के नए मोर्चों पर आगे खोज करना चाहते हैं। जैव प्रौद्योगिकी से उत्पवन्नो संकल्पेनाएं जैविक पदार्थ, जीवित कोशिकाओं पर लागू की जा सकती है और इन्हेंर नए तथा उन्नदत जैविक एवं औद्योगिकी उत्पांदों के विकास में उपयोग किया जा सकता है।

Dr Aparajita Mohanty डॉ. अपराजिता मोहंती
सहायक प्राध्यापक
वनस्पति विज्ञान विभाग, गार्गी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय

डीबीटी के निधिकरण से गार्गी कॉलेज में स्नाअतक छात्रों द्वारा अनेक व्यानवहारिक परियोजनाओं की शुरूआत की गई। इनमें से अनेक परियोजनाओं के परिणाम राष्ट्रीवय तथा अंतरराष्ट्रीिय सम्मेशलनों में प्रस्तु्त किए गए हैं, जो छात्रों के लिए अत्यंित सम्मारन जनक अनुभव है। डीबीटी की योजनाओं की सहायता से अनेक कक्षा कक्ष प्रयोग किए गए हैं, जो अब तक केवल तस्वीवरों के माध्यहम से प्रदर्शन तक सीमित थे, उन्हेंक अब अलग अलग निष्पा दित किया जाता है और इस प्रकार इन्हेंह समामेलित, ग्रहण और अच्छीस तरह समझने की क्षमता बढ़ती है।

Dr Amitabha Bandyopadhyay डॉ अमिताभ बंदोपाध्याय
बी एस बी इ की विभागीय स्नातकोत्तर समिति के संयोजक
आईआईटी, कानपुर

आईआईटी कानपुर में जैविक विज्ञान और जैव इंजीनियरी विभाग (बीएसबीई) में एम टेक कार्यक्रम को डीबीटी द्वारा समर्थन दिया जाता है। इस पाठ्यक्रम से 100 से अधिक एम टेक छात्रों को पोषण दिया गया है जो अनोखे प्रकार का है, क्यों्कि इसमें विज्ञान, आयुर्विज्ञान और इंजीनियरी के किसी भी विषय के छात्र प्रवेश ले सकते हैं। इसमें आश्चइर्य नहीं है कि हमारे अधिकांश एम टेक के स्ना्तक या तो देश के अंदर या देश के बाहर पीएच. डी. कर रहे हैं। शेष कोर कंपनी या निजी विश्वक विद्यालयों में कार्यरत हैं। डीबीटी द्वारा दिए गए समर्थन से बेशक कार्यक्रम की गुणवत्ता में एक अंतर आया है।