This website your browser does not support. Please upgrade your browser Or Use google Crome
';
नयी घोषणाएं
अन्य लिंक्स
जैव संसाधन,पर्यावरण, जैव उर्जा
bioresorces औषधीय और सुगंधित पौधों, रेशम जैव
दुनिया भर में भारत अपनी अनूठी चिकित्सा सेवा प्रणाली के लिए जाना जाता है, जिसे हम आयुर्वेद कहते है- जीवन का ज्ञान, जो जीवन शैली प्रबंधन पर आधारित प्रणाली है न कि औषधि पर निर्भर।यह सदियों पुरानी प्रणाली है। हालांकि, इसका बुनियादी जोर आध्यात्मिक रहन-सहन होने के बावजूद, आयुर्वेद भी औषधीय पौधों और जड़ी बूटियों के व्यापक ज्ञान पर आधारित है। इसके अलावा, यूनानी, सिद्ध और अमची(तिब्बती औषधि पद्धति) प्रणालियां भी लोकप्रिय हैं।

रेशम, वैज्ञानिकों के लिए भी एक खूबसूरत रूमानी अहसास की तरह रहा है।सदियों से भारत और चीन, सिल्क रूट से मध्य पूर्व और यूरोप की लंबी यात्राओं में रेशमी अहसास बुनते रहे हैं। उसके बावजूद विज्ञान थोड़ा कम रूमानियत के साथ उसके उत्पादन में वृध्दि और गुणवत्ता बरकरार रखने की कोशिश में संलग्न रहा है।

envirment जैव उर्जा

ऊर्जा सुरक्षा प्रभुसत्ता का एक मुद्दा होता है। देश का तेल आयात बिल रू. 726,386 करोड़ (यूएस $ 117 बिलियन) है और तेल के मूल्य विश्व के तेल संबंधी राजनीति पर निर्भर करते हैं इसलिए इसका विकल्प होना आवश्यक है। अनिवार्य रूप से इसका अर्थ दूसरी पीढ़ी के जैव इऔधन से है।

bioenergy पर्यावरण

दक्षिण के सभी देशों की तरह भारत के पास भी पर्यावरणीय समस्याओं की बहुलता है जैस : लकड़ी की लूट और वनों का विनाश, इसके फलस्वरूप जैव विविधता की हानि; खनन, वैध और अवैध तरीकों से; जी स्रोतों का सूखना और इस प्रकार जलीय जैव विविधता की क्षति और खेती पर दुष्प्रभाव; जलवायु परिवर्तन से जुड़े फसल पैटर्न में बदलाव, साथ ही प्रबंधन से जुड़े मुद्दे आदि। जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी कार्यक्रम का उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकीके इस्तेमाल द्वारा पर्यावरणीय समस्याओं को स्थायी रूप से समाधान करना है।