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नागरिक अधिकारपत्र

यह अधिकारपत्र विकास के लिए हमारी दृष्टि, मिशन, मूल्यों और मानकों की घोषणा और इसमें हमारे भागीदार समाज, पर्यावरण, उद्यमियों, व्यापार और उद्योग के साथ मिलकर जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता है।

दूरदृष्टि

जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने और भविष्य मे जैव प्रौद्योगिकी को यथार्थ में गरीबों के कल्याण के लिए, धन सृजन और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के साधन के रूप में ढालना है।

यह अधिकारपत्र विकास के लिए हमारी दृष्टि, मिशन, मूल्यों और मानकों की घोषणा और इसमें हमारे भागीदार समाज, पर्यावरण, उद्यमियों, व्यापार और उद्योग के साथ मिलकर जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता है।

लक्ष्य

जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान का वह अग्रणी क्षेत्र है, जिसमे मानव जाति के लाभ की अपार क्षमजैव प्रौद्योगिकी विज्ञान का ऐसा अग्रणी क्षेत्र है, जिसमें मानव जाति के लाभ की अपार क्षमता है। देश में जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और उत्कृष्टता हासिल करने के लिए भारत सरकार के व्यापार अधिनियम, 1961 के आबंटन पत्रांक संख्या CD-172/86 दिनांक 27.2.86 और संख्या CD-87/87 दिनांक 31.1.87 के तहत विभाग, पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभाग जैव प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने और उद्योगों के संवर्धन के साथ उत्कृष्टता के केंद्रो के निर्माण के लिए अनुसंधान के बुनियादी रूपरेखा के साथ, मानव संसाधन के क्षेत्रमें अपनी सेवाएं प्रदान करेगा,जिससे सामाजिक विकास के लिए जैव प्रौद्योगिकी आधारित कार्यक्रम से उत्पादित, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों और पुनः संयोजक डीएनए उत्पादों में जैव सुरक्षा के दिशा निर्देशों का कार्यान्वयन हो सके। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिको को जैव सूचना विज्ञान संबधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सूचना तंत्र के विकास में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

हमारे लक्ष्य
  • जैव प्रौद्योगिकी के संभावनाओं का संवर्धन।
  • उत्पादों के निर्माण में प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए निवेश का सुनिश्चित प्रयत्न करना।
  • कृषि, पोषण, सुरक्षा और आणविक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन दक्षता और लागत में किफायती प्रौद्योगिकी, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और जिससे मानवीय जगत में प्रौद्योगिकी जागरूकता को बढाया जा सके।
  • अनुसंधान के व्यावसायीकरण की मजबूत बुनियादी संरचना को खडा किया जा सके जिससे बाजार में नए जैव उत्पादों को लाया जा सके।
  • सामाजिक आर्थिक विकास।
  • जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों से महिलाओं, ग्रामीणों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का उत्थान।
  • जैव प्रौद्योगिकी उद्योग को बढ़ावा
प्रतिबद्धता

विभाग की प्रतिबद्धताओं में निम्नलिखित शामिल होंगे:
1. जनता के साथ व्यवहार में शिष्टता, नम्रता एवं तत्परता बनाए रखना।

2. प्रकट सूचना की गोपनीयता को बनाए रखने की प्रतिज्ञा करना

3. निर्णय प्रक्रिया में विलम्ब को कम करने के लिए सरकार की आवश्यकतानुसार प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास करना ।

4. आम जनता को शीघ्र लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से वैज्ञानिकों, उद्योग एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ विचार विमर्श कर नीतियों एवं प्रक्रियाओं में त्वरित बदलाव लाकर उन्नत सेवा प्रदान करना।

5. जितनी जल्दी हो सके कम्प्यूटरीकृत प्रचालन शुरू करने के लिए सूचना प्रणाली को अपग्रेड करना।

6. पत्रिकाओं और संगोष्ठियों इत्यादि में प्रचार-प्रसार के माध्यम से प्रमुख नीतियों एवं प्रक्रियाओं में हुए बदलावों को जनता तक तुरंत पहुँचाना।

7. वैज्ञानिकों और उद्यमियों द्वारा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना, शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित करना, उद्यमिता के लिए मार्गदर्शक भारतीय प्रयोगशालाओं से उत्पन्न खोज की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

8. आम आदमी के लिए पर्यावरण अनुकूल और उपभोक्ताओं द्वारा स्वीकार्य, सरल और किफायती जैव प्रौद्योगिकीय उत्पादों एवं सेवाओं का सृजन करना।

9. देश के स्थिर सामाजिक – आर्थिक विकास के लिए जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान के परिणामों को प्रयोग में लाना।

मूल्य

निष्ठा,  शिष्टता , तत्परता और मानवीय मूल्यों का सम्मान करने के लिए पूरी तरह से समर्पित ।

मानक

1. सार्वजनिक पूछताछ का तत्परता से उत्तर देना।

2. अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं और निधि की आवश्यकता रखने वाली अन्य परियोजनाओं की प्राप्ति की सूचना तुरंत भेजना । परियोजनाओं की प्रक्रिया जितनी जल्दी हो सके शुरू करना और तत्पश्चात् आवेदकों को निर्णय के बारे में सूचित करना ।

3. औद्योगिक अनुप्रयोग : विभाग को प्रेषित सभी मामलों को शीघ्र निपटाना। निपटान के लिए अधिक समय लेने वाले कार्यों के बारे में आवेदकों को समय-समय पर सूचित करना ।

4. पुर्नसंर्योजी डीएनए अनुसंधान एवं अनुप्रयोगः सभी आवेदकों को प्रारंभिक पूछताछ की प्राप्ति के तुरंत बाद आवेदकों को निर्णय के बारे में सूचित करना। निपटान के लिए अधिक समय की आवश्यकता वाले मुद्दों के बारे में आवेदकों को समय-समय पर सूचित करना ।

5. सेमिनार / परिचर्चा के लिए प्राप्त सभी आवेदन पत्रों की प्राप्ति सूचना तुरंत दे दी जाएगी और संपूर्ण आवेदन भेजने वाले आवेदकों को सेमिनार / परिचर्चा की निर्धारित तिथि से पहले समय रहते अंतिम निर्णय के बारे में सूचित कर दिया जाएगा।

पूछताछ

अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं और अन्य तकनीकी मामलों से संबंधित शिकायतों का तुरंत निपटारा करना । यदि शिकायत अनुत्तरित रह जाती है तो शिकायतकर्ता इसे संबंधित ग्रुप लीडर के ध्यान में ला सकता है।

कार्यान्वयन प्रणाली

विभाग जनता को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

सभी ग्रुप लीडर सार्वजनिक पूछताछ का उत्तर देने के लिए जिम्मेदार होंगे।