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जलीय कृषि और समुद्री जैव प्रौद्योगिकी
कार्यक्रम क्षेत्र के विस्तृत उद्देश्य:
  • जलकृषि में प्रमुख रोगों के लिए निदान और दवाओं का विकास
  • जलकृषि उत्पादन प्रणाली की प्रौद्योगिकी-आर्थिक सक्षमता सिद्ध करने के लिए गैर-पारंपरिक प्रजातियों में संवर्द्धन प्रौद्योगिकी और अग्रपंक्ति प्रदर्शनों का विकास
  • जलकृषि प्रजातियों की वृद्धि के लिए नवीन चारा विकास, मत्स्य पोषण, ब्रीडिंग एवं प्रजनन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, उपज-उपरांत और मूल्य-वर्द्धन पर नवीन पहलु
  • विविध जलकृषि प्रजातियों में इन-विट्रो ऊतक/कोशिका संवर्द्धन प्रणाली का विकास
  • समुद्री औषध विज्ञान, जैव-सामग्री, जैव-आसंजक, जैव-ऊन, जैव-आर्द्रक, चिकित्सकीय प्रत्यारोपण, जैवबहुलक, जैव-प्लास्टिक, अनुपम एंजाइम्स, जैव-संसूचक एवं जैव-उपचार
  • चिकित्सा पद्धति और सजावट के लिए मतस्य ट्रांसजेनिक्स
  • समुद्री एक्सट्रीमोफिलेस
  • भारतीय जलकृषि प्रजाति के आण्विक जीवविज्ञान एवं प्रोटियोमिक्स अध्ययनों सहित ट्रांसजेनेसिस कार्य के लिए लाभदायक जीन की पहचान।
  • जलकृषि एवं समुद्रीय जैवप्रौद्योगिकी में कार्यक्रम सहायता/उत्कृष्टता केंद्र
  • मतस्यिकी व्यावसायिकों के लिए आण्विक जीवविज्ञान में प्रशिक्षण सहायता
  • जलकृषि प्रणाली के लिए कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल

जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

योजना (कार्यक्रम की उत्पत्ति):

समुद्री संसाधनों से लाभदायक उत्पाद एवं प्रक्रम के विकास की दिशा में अनुसंधान एवं विकास को सहायता देने तथा प्रकृति की परियोजनाओं के प्रदर्शन के लिए विभाग द्वारा 1988-89 के दौरान जलकृषि एवं समुद्रीय जैवप्रौद्योगिकी कार्यक्रम आरंभ किया गया था। साथ ही यह कार्यक्रम जैवप्रौद्योगिकी उपकरणों एवं तकनीकों के अंगीकरण व उन्नत प्रौद्योगिकी के माध्यम से जलकृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के लिए भी था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आण्विक जीवविज्ञान में विशेषज्ञता प्राप्त मानव संसाधन तैयार करने, अवसंरचनात्मक विकास और अनुसंधान में वृद्धि एवं शीघ्रता लाने के लिए आधुनिकतम अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं की स्थापना के रूप में एक स्पष्ट प्रभाव पैदा करना है। जलकृषि और समुद्री जैवप्रौद्योगिकी को संबोधित करते क्षेत्रों जैसेकि चारा और पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आण्विक उपकरणों एवं तकनीकों के अंगीकरण के द्वारा उत्पादकता वृद्धि, समुद्री जिनोमिक्स और प्रोटियोमिक्स एवं एक्सट्रीमोफिलेस के विविध क्षेत्रकों पर जोर देते हुए नवाचारी सुविधाओं से जलीय एवं समुद्री क्षेत्रकों को लाभ प्रदान करने और वैज्ञानिक और अनुसंधान समुदाय को अच्छी अनुसंधान प्राथमिकताओं की दिशा में कार्य करने में सहायता प्रदान करने की आशा है। अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रकों में तेजी लाने के लिए डीबीटी समुद्री जैवप्रौद्योगिकी और जलकृषि के थीम आधारित क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के भी प्रयत्न कर रहा है।

कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की रणनीति

प्रतियोगी अनुसंधान अनुदान प्रक्रिया

मोनिटरन एवं परामर्शन

1. कार्य बल तंत्र
2. परियोजना मोनिटरन समिति
3. क्षेत्र / प्रयोगशाला भ्रमण



संपर्क हेतु पता
प्रभाग के अध्यक्ष
डॉ. ए. एस. निनावे
सलाहकार
जैवप्रौद्योगिकी विभाग,
छठा ताल, कमरा सं. 607,
ब्लॉक-2, सीजीओ कॉम्प्लेक्स,
लोधी रोड़, नई दिल्ली-110003
दूरभाष: 011-24363501
ईमेल: ninawe[dot]dbt[at]nic[dot]in

कार्यक्रम अधिकारी
डॉ. शहाज उद्दीन अहमद पीएच.डी.
वैज्ञानिक ‘सी’
जैवप्रौद्योगिकी विभाग
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
भारत सरकार
सीजीओ कॉम्प्लेक्स, ब्लॉक-2, 6-8वां ताल
कमरा सं. 814, लोधी रोड़, नई दिल्ली-110003
ईमेल: shahaj[dot]ahmed[at]nic[dot]in