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विशेष कार्यक्रम (पूर्वोत्तर राज्यो के लिए)

भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) एक संपूर्ण जैविक खजाना है, जिसे पूरी तरह से खंगाला नहीं गया है| उदाहरण के लिए अकेले सिक्किम में लगभग 800 प्रकार के औषधीय पौधे और जड़ी बूटियाँ हैं, जिनके बारे में स्थानीय सामान्य लोगों जो बहुत ही तेजी से लुप्त हो रहे है को ही जानकारी है और जिनके सक्रिय अवयवों को अब तक अधिकांश रूप से अभिलकचित नहीं किया जा सकता है| वास्तव में पूर्वोत्तर क्षेत्र, जैवविविधता के सबसे समृद्ध क्षेत्रो में से एक है और इन वनस्पतियों में से अधिकतर के औषधीय, सुगंधित, खाद्य, पारिस्थितिकीय और प्रसाधन व सजावटी मूल्यों को अभिलक्षणित किया जाना बाकी है|

इसके अलावा एन ई आर की उदात्त जलवायु व बेहद उपजाऊ मिट्टी, कृषि,वृक्षारोपण व रेशम उत्पादन के लिए बेहतरीन वातावरण का निर्माण करते हैं। उष्णकटिबंधीय जलवायु,घनघोर वर्षा, प्रचुर धूप के साथ विलक्षण जैवभौगोलिक स्थिति, यहां की समृद्ध वनस्पति व जीवजगत जैव विविधता के लिए जिम्मेदार हैं। देश के भौगोलिक क्षेत्र का मात्र आठ प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद वनस्पति के मामले में पूर्वोत्तर आधे से अधिक वनस्पतियों का भंडार क्षेत्र है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र की स्थानीय प्रजातियों पर जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास, पेटेंट की दृष्टि से बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगा। इस पूरे विविध पारितंत्रो में फैले व स्थानीय समुदायों द्वारा पोषित समृद्ध आनुवांशिक संसाधन इस क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि व विकास की असीम संभावनाए उत्पन्न कर रहा है। इस तरह जैवप्रौद्योगिकी आधारित कार्यकलापों के मद्देनज़र पूर्वोत्तर क्षेत्र में समग्र विकास के असीम अवसर उपलब्ध हैं।

देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैवप्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यकलापों को प्रोत्साहन देने के अपने वादे को पूरा करने के मद्देनज़र जैवप्रौद्योगिक विभाग (डीबीटी) ने वर्ष 2009-10 में ‘बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया लिमिटेड’ (बी सी आई एल) के माध्यम से नार्थ इस्टर्न रीजन – बायोटेक्नोलॉजी प्रोग्राम मैनेजनेंट सेल (एन ई आर जी बी एम सी) की स्थापना भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में जैवप्रद्योगिकी कार्यक्रम के समन्वय व निगरानी हेतु की एन ई आर पी बी एम सी केंद्र व राज्यों के विभिन्न सरकारी एजेंसीयों मंत्रालयों/केंद्र व राज्य सरकार के विभागों सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों के विकास और क्रियान्वयन में लगा है।

एन ई आर बी पी एम सी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास के लिए जैवप्रौद्योगिकी आधारित विभिन्न गतिविधियों को शुरू किया है,जिसमें शामिल हैं:-

संपर्क

डॉ.टी मदन मोहन
डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी,
मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली।