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रा.पा.जी.अनु.सं. में 8 वें रामालिंगास्वामी सम्मेलन के अवसर पर प्रेस विज्ञप्ति

8 th Ramalingaswami Conclave at NIPGR slider2
रामालिंगास्वामी फैलोशिप कार्यक्रम, भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एक प्रमुख योजना है जिसे विदेश में काम कर रहे भारतीय प्रतिभा को आकर्षित कर अपने देश में वापसी हेतु तैयार किया गया है। रामालिंगास्वामी फेलो के आठवें सम्मेलन का आयोजन बायोटेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (रा.पा.जी.अनु.सं.) नई दिल्ली, द्वारा 15-17 फरवरी, 2018 को आयोजित किया गया। यह फैलोशिप का दसवां साल है, इस अवसर पर इसके प्रगति एवं इनपुट का आकलन किया गया।

इस संबंध में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, पर्यावरण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, के माननीय केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 17 फरवरी, 2018 को रा.पा.जी.अनु.सं. का दौरा किया और रामालिंगास्वामी अध्येताओं को संबोधित किया। डॉ. एस. एस. कोहली, सलाहकार, विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग, ने भी अध्येताओं के साथ बातचीत की।

रामालिंगास्वामी पुन: प्रवेश फैलोशिप को विदेशों में काम करने वाले वैज्ञानिकों (भारतीय राष्ट्रीय) को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है जो आधुनिक जीवविज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों में अपने अनुसंधान को जारी रखने के लिए गृह देश में लौटना चाहते हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने उल्लेख किया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ‘प्रतिभा पलायन को प्रतिभा वापसी में बदल कर’ विकास, ट्रांसलेशन और प्रसार के संदर्भ में जीवविज्ञान, आधुनिक बायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च में देश की मानव संसाधन क्षमता में सुधार करना है। पिछले दस वर्षों के दौरान 1492 आवेदन पत्र प्राप्त हुए और इन में से 396 को फैलोशिप की पेशकश की गई और 283 अध्येताओं ने भारतीय प्रयोगशालाओं में पदों को स्वीकार कर लिया है। अब तक 190 अध्येताओं भारत में विभिन्न मेजबान संस्थानों में स्थायी संकाय पदों पर नियुक्त हुए हैं। अध्येताओं ने अपने शोध में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने पीयर-रिव्युड राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में 833 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। इसके अतिरिक्त 53 नई प्रौद्योगिकियों को उनके द्वारा विकसित किया गया है, जिनमें से 33 पेटेंट कराए गए हैं एवं दो स्टार्ट-अप कंपनियां बनायी गई हैं। रामलिंगस्वामी अध्येताओं ने कई सम्मान प्राप्त किए हैं, जिसमें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (दो अध्येता) शामिल हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सलाहकार डॉ. मीनाक्षी मुंशी ने घोषणा की कि फैलोशिप ₹85,000 / – प्लस एचआरए ₹ 7,500 / – प्रति माह से संशोधित कर ₹ 1,00,000 / – प्लस ₹ 18,500 / – एचआरए प्रति माह कर दी गई है। इसके अतिरिक्त एक निश्चित समय में फैलोशिप की संख्या 50 से बढ़ा कर 75 तक कर दिया गया है।