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लोटस परियोजना को लेफ्टिनेंट गवर्नर एस अनिल बैजल की निरीक्षण यात्रा
बारापुला ड्रेन, सन डायल पार्क, सराय काले खान, दिल्ली 11 नवंबर, 2017 को लोटस एचआर परियोजना के लेफ्टिनेंट गवर्नर एस अनिल बैजल की निरीक्षण यात्रा 0830 बजे

रैपिड फायर :

  • लेफ्टिनेंट गवर्नर श्री अनिल बैजल ने बारापुला ड्रेन साइट पर लोटसएचआर परियोजना की प्रगति का जायजा लिया।
  • लोटसएचआर परियोजना का लक्ष्य प्रदूषक हटाने के लिए जल उपचार तकनीकों को विकसित करना है जिसमें भारी धातु और नए और उभरते प्रदूषक शामिल हैं।
  • लेफ्टिनेंट गवर्नर ने डीबीटी और नीदरलैंड ऑर्गनाइजेशन ऑफ साइंटिफिक रिसर्च को बधाई दी और उन्होंने आईआईटी दिल्ली, डीडीए और डीजेबी को परियोजना के सुचारु समन्वय के लिए निर्देश दिए।
  • उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना से मिलने वाले लाभ दूर तक पहुंचने वाले प्रभाव हैं: स्वच्छ, औद्योगिक, कृषि और सामुदायिक उपयोग के लिए स्वच्छ पानी।

पृष्ठभूमि:
जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार और नीदरलैंड ऑर्गनाइजेशन ऑफ साइंटिफिक रिसर्च, नीदरलैंड्स सरकार मिलजुलकर लोटसएचआर (स्वस्थ पुन: उपयोग के लिए शहरी मलजल धाराओं का स्थासनीय उपचार) (स्वच्छ बारापुला) का कार्यान्व यन कर रहे हैं और यह एक संयुक्त भारत-नीदरलैंड सहयोगात्मचक परियोजना है।

परियोजना का उद्देश्य एक नए समग्र अपशिष्ट जल प्रबंधन दृष्टिकोण का प्रदर्शन करना है, जिससे स्वच्छ पानी का उत्पादन किया जाएगा, जिसे विभिन्न कार्यों (जैसे औद्योगिक, कृषि, सामुदायिक उपयोग आदि) के लिए पुन: उपयोग किया जा सकता है, साथ ही साथ शहरी अपशिष्ट जल से पोषक तत्वों और ऊर्जा को प्राप्त करने के दौरान, इस प्रकार ड्रेन को लाभकारी रूप में परिवर्तित किया जा सकेगा। पारंपरिक और उभरते प्रदूषकों को हटाने के लिए रोगाणुओं को हटाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसे मौजूदा एसटीपी / डब्ल्यूडब्ल्यूटीपी में उपेक्षित किया जाता है।

डीडीए के साथ परामर्श में डीबीटी ने प्रस्तावित अंतःविषय तकनीकी समाधान के लिए एक प्रदर्शन स्थल के रूप में दिल्ली राज्य में बारापुला ड्रेन, सराय काले खां को चुन लिया है। बारापुला यमुना नदी में लगभग 30% प्रदूषण के लिए जिम्मेदार 12.5 कि. मी. लंबी नाली है, जो मुख्य रूप से घरेलू मलजल और छोटे उद्योगों का संग्रह करती है।

प्रतिभागी संस्थान: -
भारतीय पक्ष: आईआईटी-दिल्ली, टेरी-नई दिल्ली और नीरी-नागपुर
डच पक्ष: टीयू डेल्फ़ट, यूनेस्को, वैगनिंगन विश्वविद्यालय, एनआईओयू-केएनएडब्ल्यू, वीरिए यूनिवर्सिटी

परियोजना की गतिविधियों पर अपडेट: -
लोटसएचआर परियोजना का उद्घाटन लेफ्टिनेंट गवर्नर, नई दिल्ली, श्री अनिल बैजल ने माननीय केन्द्रीय मंत्री, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान, डॉ. हर्षवर्धन और नीदरलैंड के विदेश मंत्री मंत्री बर्ट कोडेर्स के साथ 9 मई 2017 को किया।
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परियोजना में काफी गति से प्रगति की गई है; बारापुला साइट पर ऑनसाइट परीक्षण प्रयोगशाला के निर्माण के साथ पूरा किया। सभी 20 स्थानों पर नमूने को नाली के पानी के लक्षण वर्णन के लिए निष्पादित किया गया है। डेटा 1 महीने के अंदर उपलब्ध हो जाएगा।

आईआईटी-दिल्ली और टेरी की प्रयोगशालाओं में नाली के पानी के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं और उनका परीक्षण छोटे परीक्षण रिएक्टरों पर किया जा रहा है, प्राप्तल डेटा को डच भागीदारों के साथ साझा किया जा रहा है। पीएच.डी. और नीदरलैंड्स के पोस्ट डॉक्टरल छात्रों ने भी पानी की जांच के लिए भारत में 3 महीने बिताए हैं। साइट पर स्थापित किए जाने वाले रिएक्टरों के मानकों का मानकीकरण चल रहा है।

जनवरी 2018 तक परीक्षण स्थल पर कई उपचार तकनीकों (एनेरोबिक झिल्ली बायोरिएक्टर, डिजॉल्ड् ज एयर फ्लोटेशन, फोटोबायोरिएक्टर और वेटलैंड) का प्रदर्शन किया जाएगा। ये प्रदर्शन पानी में प्रदूषक भार में मौसमी विविधताओं के दौरान उपचार प्रभावकारिता का प्रभावी तरीके से परीक्षण करने के लिए एक वर्ष तक चलेंगे।

वितरण योग्य: -
इस परियोजना में एक नवाचारी प्रायोगिक पैमाने के संयंत्र का विकास किया जाएगा जो एक विशिष्ट स्थान पर भारतीय परिस्थितियों से निपटने के लिए उपयुक्त है। अत्यधिक आबादी वाले शहरी इलाकों में फिट होने के लिए प्रायोगिक पैमाने के संयंत्र का अंतिम डिजाइन स्केलेबल और मॉड्यूलर होगा।

लेफ्टिनेंट गवर्नर की निरीक्षण यात्रा

1.लेफ्टिनेंट गवर्नर, श्री अनिल बैजल ने एक संक्षिप्त सूचना पर परियोजना में हुई प्रगति का ब्यौषरा लेने के लिए बारापुला ड्रेन साइट, सन डायल पार्क, सराय काले खां में लोटसएचआर परियोजना की प्रगति जानने के लिए दौरा किया।

2.लोटसएचआर परियोजना का लक्ष्य प्रदूषक हटाने के लिए जल उपचार तकनीकों को विकसित करना है जिसमें भारी धातु सहित नए और उभरते हुए दूषित पदार्थ शामिल हैं, जो आम तौर पर मौजूदा पारंपरिक सीवेज उपचार संयंत्रों में पता नहीं लगाए जाते हैं

3.लेफ्टिनेंट गवर्नर, श्री अनिल बैजल, डॉ. के विजयराघवन, सचिव, डीबीटी, भारत सरकार, प्रोफेसर टी.आर. श्रीकृष्णन, परियोजना समन्वयक और डीन आईआईटी दिल्ली के साथ, श्री उदय प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष डीडीए, डीजेबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केशव चंद्र और एस. बी. के. सिंह, विशेष पुलिस आयुक्त, दिल्ली पुलिस और सुश्री वर्षा जोशी, विद्युत सचिव, दिल्ली सरकार गए।

4.बायोटेक्नोलॉजी विभाग, भारत सरकार और नीदरलैंड के वैज्ञानिक शोध संगठन को बधाई देते हुए लेफ्टिनेंट गवर्नर ने इस परियोजना में शामिल विभिन्न विभागों अर्थात आईआईटी दिल्ली, डीडीए, डीजेबी के सुचारु समन्वय के लिए निर्देश दिए थे। उन्होंने सलाह दी कि यह परियोजना सरकारी समुदाय-विज्ञान संवाद और केंद्र के लिए एक केंद्र होना चाहिए

5.उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना से मिलने वाले लाभ इसके दूरगामी प्रभाव हैं: स्वच्छेता, औद्योगिक, कृषि और सामुदायिक उपयोग के लिए स्वच्छ पानी। कचरे की प्राप्ति और गैस / बिजली उत्पादन के लिए अपशिष्ट जल के पुन: नवीनीकरण और पुन: उपयोग के लिए सभी क्षेत्रों को लाभ होगा और इसलिए हर तरह से लाभ की प्रतिभागिता के लिए दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए और दिल्ली की अन्य एजेंसियां भी इस साझेदारी के लिए डीबीटी का समर्थन करती हैं।