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भारत – यूके संयुक्त शोध के माध्यम से रोग विरोधी प्रतिरोध को संबोधित करने के लिए मिलकर कार्य जारी है

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रैपिड फायर :

  • एएमआर अनुसंधान पर भारत-ब्रिटेन कार्यनीतिक समूह ने नई दिल्ली में 7 नवंबर 2017 को अपनी दूसरी बैठक आयोजित की।
  • इस बैठक में उन्होंने एएमआर को एक गंभीर वैश्विक वैश्विक खतरा से निपटने के लिए परस्पर अनुसंधान प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
  • सामरिक समूह ने एएमआर अनुसंधान विशेषज्ञों का भी स्वागत किया जो भारत-ब्रिटेन की सैंडपिट – स्टासइल कार्यशाला में भाग ले रहे हैं।
  • यह कार्यशाला डीबीटी और आरसीयूके द्वारा दिल्ली एनसीआर में 7 से 10 नवंबर तक आयोजित किया जा रही है।
  • यह अंतःविषयक अनुसंधान दलों के गठन और एएमआर के विभिन्न पक्षों में अनुसंधान के लिए संयुक्त रूपरेखा प्रस्ताव बनाने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा।
  • प्रोफेसर के. विजय राघवन, सचिव, डीबीटी ने कहा, “एएमआर की पहचान, निदान और प्रसार के बारे में हमने अनुसंधान प्रयास किए हैं।”

एंटीमाइक्रोबायल रेजिस्टें स (एएमआर) रिसर्च पर गठित भारत-यूके सामरिक समूह ने एएमआर के तेजी से गंभीर होते वैश्विक खतरे से निपटने के लिए आपसी अनुसंधान प्राथमिकताओं पर चर्चा करने के लिए 7 नवंबर, 2017 को नई दिल्ली में अपनी दूसरी बैठक आयोजित की। उन्होंने पिछले नवंबर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के लिए, पर्यावरण मंत्री, वन और जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी विज्ञान मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन और यूनिवर्सिटी, साइंस, रिसर्च एंड इनोवेशन जो जॉनसन के लिए ब्रिटेन के राज्य मंत्री द्वारा शुभारंभ के बाद से एएमआर में भारत-ब्रिटेन की साझेदारी की प्रगति का भी मूल्यांकन किया।

भारत-यूके एएमआर सहयोग का नेतृत्व भारत का जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और ब्रिटेन अनुसंधान परिषद करते हैं। डीबीटी और आरसीयूके दोनों ही नोडल एजेंसियां हैं जो भारत में अन्य अनुसंधान वित्तपोषण साझेदारों के साथ समन्वैय करती हैं जैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय।

सामरिक समूह ने नवंबर 2016 में अपनी पहली बैठक के बाद से हुई प्रगति की सराहना की है, जो भारत में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टें0स (एएमआर) रिसर्च पर मैपिंग रिपोर्ट सफलतापूर्वक शुरू की गई। इसे भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, श्री वाई एस चौधरी और ब्रिटेन के राज्य मंत्री, विज्ञान, अनुसंधान और अभिनव जो जॉनसन ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में पिछले हफ्ते जारी किया था। इसके अलावा इस समारोह में सर वेंकटरामन रामकृष्णन, नोबेल पुरस्कार विजेता और रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष, प्रोफेसर के विजयराघवन, सचिव डीबीटी और भारत के ब्रिटिश उच्चायुक्त सर डोमिनिक असकिथ केसीएमजी भी शामिल थे।

दोनों मंत्रियों ने संयुक्त रिपोर्ट का स्वागत किया और डीबीटी-आरसीयूके एएमआर साझेदारी को संबोधित किया। इस रिपोर्ट में हमारी समझ के अंतराल की पहचान की गई है, विशेष रूप से उच्च रोग के बोझ वाले देशों में, और यह दर्शाता है कि हम पर्यावरण, औद्योगिक अपशिष्ट, खेती की प्रथाओं सहित और लोग मूल्यवान एंटीबायोटिक दवाओं को कैसे उपयोग करते हैं, इसमें संभावित कार्रवाई के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भरने के लिए बहु विषयक अनुसंधान का उपयोग कर सकते हैं।

सामरिक समूह ने भारत और ब्रिटेन के एएमआर अनुसंधान विशेषज्ञों का भी स्वागत किया जो इस सप्ताह भारत-ब्रिटेन के सैंडपिट – स्टाएइल कार्यशाला में भाग ले रहे हैं ताकि एएमआर अनुसंधान के लिए बाह्य प्रस्ताव तैयार किए जा सकें। यह कार्यशाला डीबीटी और आरसीयूके द्वारा दिल्ली एनसीआर में 7 से 10 नवंबर तक आयोजित किया गई है, और यह एएमआर के विभिन्न पक्षों में अनुसंधान के लिए अंतःविषयक अनुसंधान दलों और संयुक्त रूपरेखा प्रस्ताव बनाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा।

इस कार्यशाला के परिणामस्वरूप वित्त पोषित परियोजनाओं पर न्यूटन भाभा फंड के अंतर्गत, £ 13 मिलियन तक की संयुक्त निधि का उपयोग किया जाएगा।

प्रोफेसर के. विजय राघवन, सचिव, डीबीटी ने कहा : “एएमआर चुनौती भारत के नजरिए से बहुत बड़ी है क्योंकि यह न केवल एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के आस पास घूमती है, बल्कि यह पशुपालन उद्योग में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग, औद्योगिक अपशिष्ट और उपयोग के इर्द गिर्द भी है, जो आगे चलकर खाद्य श्रृंखला और सार्वजनिक जल आपूर्ति को प्रभावित करते हैं, जिससे प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो जाते हैं। हमारे अनुसंधान प्रयास एएमआर का पता लगाने, निदान और प्रसार को संबोधित करने पर रहे हैं। इन प्रयासों को बढ़ाने में हमारी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी महत्वपूर्ण है। ”

प्रोफेसर स्टुअर्ट टैबर्नर, निदेशक, इंटरनेशनल एंड इंटरडिसीप्लिनरी रिसर्च, आरसीयूके, ने कहा : “एएमआर जैसे वैश्विक चुनौतियों को उस मजबूत, सहयोगी अनुसंधान साझेदारी से संबोधित किया जा सकता है, जिस प्रकार भारत और ब्रिटेन एएमआर में विभिन्न पक्षों के माध्यम से प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि संयुक्त मानचित्रण रिपोर्ट हमारी समझ में कुछ अंतराल बताए गए हैं, मुझे उम्मीद है कि कुछ प्रस्ताव जो इंटरेक्टिव वर्कशॉप में विकसित किए जाएंगे, वे इन अंतर को पूरा करने में मदद करेंगे। ”