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जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक जैव-ऊर्जा और बायोप्रोडक्ट में भारी वृद्धि

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रेपिड फायर :

  • अनुमान है कि पेरिस समझौते को पूरा करने के लिए 2030 तक वैश्विक ऊर्जा खपत में आधुनिक बायोएनर्जी की हिस्सेेदारी के कम से कम दोगुना का लक्ष्य दर्शाया गया है।
  • एमआई एंड बीपी देशों के लिए स्थायी जैव ईंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जैव-ऊर्जा विकास पर भारत की स्थिति 26 मई और 27 फरवरी 2018 को नई दिल्ली में प्रस्तुत की गई थी, जिसकी मेजबानी भारत में होगी।
  • बायोफ़्यूचर प्लेटफॉर्म के बीस सदस्य देशों ने यूएनएफसीसीसी सीओपी 23 के दौरान बॉन, जर्मनी में नवंबर में वैश्विक एजेंडे में बड़े पैमाने पर स्थायी, कम कार्बन जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की आवश्यकता में सशक्ते दूरदृष्टि संकल्पैना का समर्थन किया।

साओ पॉलो, 25 अक्टूबर। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुमानों के मुताबिक, यदि विश्व में तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ता है तो 2030 तक विश्वं की ऊर्जा उपयोग के हिस्से के रूप में जैव-ऊर्जा का उपयोग दोगुने से अधिक होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) में नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख पाओलो फ्रैंकल ने कहा, ”हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हमें जैव-ऊर्जा को बड़े पैमाने पर बढ़ाना है और इसे तेजी से करना है।” biofuture_slider

इस मामले पर महत्वपूर्ण आगामी रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर फ्रैंकल ने कहा, ”स्था यी जैव-ऊर्जा सभी जलवायु परिवर्तन शमन परिदृश्यों में कम-कार्बन प्रौद्योगिकियों के आवश्यक पोर्टफोलियो का एक अनिवार्य घटक है।” और यह जैव-ऊर्जा में परिनियोजन की गति और निवेशों के पैमाने के संदर्भ में हमें जो चाहिए और आज जो हो रहा है इसके बीच एक बहुत बड़ा अंतर है।”

ये घोषणाएं बायोफ्यूचर प्लेटफॉर्म के पहले प्रमुख सम्मेलन, बायोफ्यूचर शिखर सम्मेलन के भाग के रूप में की गईं, जो बीस देशों की सरकार, उद्योग और अनुसंधान समुदाय के गठबंधन से बनाया गया, और इसका लक्ष्यट आधुनिक, सतत, कम कार्बन जैव-अर्थव्यवस्था का विकास करना है। माराकेश में यूएनएफसीसीसी सीओपी 23 के दौरान नवंबर 2016 में इसका शुभारंभ किया। साओ पॉलो, ब्राजील में 24 और 25 अक्तूबर को 28 देशों से आए 270 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ मिलकर दो दिवसीय शिखर सम्मेलन मानवता के भविष्य : बड़े पैमाने पर, स्थायी, कम-कार्बन जैव-अर्थव्यवस्था बनाने के लिए संगत चुनौती का सामना करने के सर्वोत्तम तरीकों पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया। यह कम कार्बन ईंधन को बढ़ावा देने के लक्ष्य के लिए सतत विकास के लिए विश्व व्यापार परिषद (डब्ल्यूबीसीएसडी) द्वारा समर्थित निगमित गठबंधन सहित 50 से कम की प्रतिभागिता में आयोजित किया।

ब्राजील, कनाडा, फिनलैंड, भारत, इटली, यूके, अमेरिका और अन्य देशों से सरकारी नीति निर्माताओं ने कैलिफोर्निया के एलसीएफएस, ब्राजील के आगामी रेनोवा बायो, कनाडा के क्लीन फ्यूल स्टैंनडर्ड सहित जैव-अर्थव्य्वस्थाए की दृष्टि से 1 बिलियन टन डॉलर और उससे अधिक जैव-ऊर्जा और जैव-अर्थव्यवस्था के लिए अपने संबंधित वर्तमान और भविष्य की नीतियों और कार्यक्रमों पर खुलकर बहस की। बायोफ्यूचर के प्रतिभागियों द्वारा परिभाषित जैव-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, सामग्री और रसायनों जैसे ऊर्जा और उत्पादों पर आधारित जीवाश्म के लिए सतत, कम कार्बन वैकल्पिक का उत्पादन करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करके बायोमास का उपयोग होता है।

एमआई और बीपी देशों के लिए सतत जैव ईंधन पर अंतरराष्ट्री य सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में जैव-प्रौद्योगिकी विभाग में संयुक्त निदेशक डॉ. संगीता एम. कस्तूर द्वारा भारत की स्थिति का विवरण दिया गया था और घोषणा की गई थी कि भारत द्वारा 26 और 27 फरवरी 2018 को यह आयोजित किया जाएगा।

उद्योग के सदस्यों ने अपनी ओर से रूपांतरण प्रौद्योगिकियों और कृषि क्रांतियों, जैसे उच्च घनत्व, एनर्जी-केन, अपशिष्टक और जैव-मीथेन उपयोग, सेल्यूलोजिक रूपांतरण, और कई दूसरों पर महत्वपूर्ण अग्रिमों पर प्रकाश डाला। ग्रैनबायो के सीईओ, बर्नार्डो ग्रेडीन ने कहा विश्व, में पांच प्रथम-श्रेणी में से एक, व्यावसायिक स्तर की सेकंड जनरेशन के एथेनॉल प्लांोट के लिए जिम्मेदार कंपनी ”प्रौद्योगिकी जोखिम अब मुख्यं चुनौती नहीं है जैसे यह कुछ वर्ष पहले था, लेकिन पूंजीगत संसाधनों तक पहुंच अब भी चुनौती है”।

ब्राजील के विदेश मंत्री, एलॉयसियो नून्स फेरेरा, ने शिखर सम्मेलन की मेजबानी करते हुए कहा ”मानव मनोविज्ञान द्विलेखों जैसे ‘खाद्य बनाम ईंधन’ या ‘इलेक्ट्रिक वाहन बनाम जैव ईंधन’ में चीजों को आसान बनाया जाता है जबकि किसी भी गंभीर विश्लेषण प्रवृत्तियों, अनुमानों को ध्या न में रखते हुए और मामलों का उपयोग करने वाले को उन द्विभाजन को छद्म रूप में उजागर करना होगा”। ”यह सिद्ध है कि यदि दुनिया को अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करना है तो हमें विद्युत वाहनों की और साथ ही मौजूदा वाहन बेड़े और मूलसंरचना में जैव-ईंधन के त्वरित परिनियोजन की जरूरत है। श्री नून्स ने कहा ”यह सिद्ध है कि नीतियों, प्रौद्योगिकी और विनियमन के सही संयोजन के साथ, हम वनों की कटाई को कम करते हुए, अधिक भोजन और अधिक ऊर्जा पैदा कर सकते हैं।

इंटरनेशनल रिन्यूदवेबल एनर्जी एजेंसी (आईआरएनए) के उप महानिदेशक, साकारी ओक्सानेन ने सहमति दर्शाई कि “परिवहन के लिए नवीकरणीय जैव-ऊर्जा समाधान: विद्युत वाहनों के लिए बिजली की आपूर्ति, जैसा कि हल्के वाहनों के लिए ईवीएस चरण के रूप में जैव ईंधन और लंबी अवधि में उड्डयन, समुद्री और माल के जैव-ईंधन के रूप में महत्वपूर्ण हैं।”

भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के जैव ईंधन के कार्य समूह के अध्यक्ष वाई. बी. रामकृष्ण ने कहा ”बहुत कम जमीन और कई लोग खाने के लिए तैयार हैं, भारत दूसरी जनरेशन की प्रौद्योगिकियों और चावल और मक्का की भूसी और अन्य फीडस्टॉक्स का उपयोग करके अपनी जैव-अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर अवशेषों के उपयोग को उन्न त बना रहा है। ”भारत का लक्ष्य 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत बायो-एथेनॉल और डीजल में 5 प्रतिशत बायो-डीजल मिश्रण जल्दी से जल्दीक पूरा करना है। भारतीय तेल कंपनियों को देश के 11 राज्यों में बारह सेकंड जनरेशन प्लां ट स्थापित करना है।”

47 वक्ताओं और कुछ प्रमुख संदेशों के आसपास नीति निर्माताओं के द्वारा व्यक्त कई विचारों के बीच एक स्पष्ट, उभरती हुई आम सहमति इस प्रकार थी:

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जैव-ऊर्जा को उन्नत जैव-उत्पाद और बायोमैटिरियल्स के लिए विस्तारित जैव-अर्थव्यवस्था के साथ-साथ जैविक ऊर्जा को तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए,
  • स्मार्ट कृषि पद्धतियों, पशुधन को बढ़ाने, दूसरी पीढ़ी के उत्पािदन और अन्य उन्नत जैव-ईंधनों की तीव्रता; उच्च घनत्व ऊर्जा फसलों, और ग्रामीण और शहरी अपशिष्ट का उपयोग; स्थायी रूप से उपयोग किए जाने के लिए पर्याप्त फीडस्टॉक क्षमता है,
  • जलवायु के फायदों के अलावा, जैव-अर्थव्यवस्था रोजगार सृजन, सतत विकास, तकनीकी नवाचार, कृषि गहनता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपार अवसर प्रदान किए जाते हैं;
  • साहसिक, स्मार्ट नीतियों और स्थिर रूपरेखा की आवश्यकता होगी ताकि निवेश की कमी, नीतियो की अनिश्चितता, तेल की कम कीमतों, शुरुआती स्तरीय प्रौद्योगिकियों के लिए पूंजी की कमी, जीवाश्म ईंधन सब्सिडी और व्यापक स्थिरता की कमी सहित क्षेत्र की बड़ी चुनौतियों से उबरने के लिए उपयुक्त् माहौल बनाया जा सके।

यूनाइटिड नेशन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाेइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी सीओपी 23) की पार्टियों के 23 वें सम्मेलन में 16 नवंबर को बायोफ्यूचर प्लेटफार्म के 20 सदस्य देशों के मंत्रियों और उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों द्वारा बायोफ्यूचर विजन स्टेटमेंट में शिखर सम्मेलन के विचारों को आधिकारिक तौर पर अनुमोदित किया गया। जो जर्मनी के बॉन में 6 से 17 नवंबर के बीच हुआ। विजन स्टेटमेंट के उद्देश्यों में जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए तत्काल समाधान के रूप में वैश्विक कार्य सूची में स्थायी कम कार्बन जैव-अर्थव्यबवस्था को ऊपर उठाने में मदद करना और अगले दशकों में क्षेत्र के लिए बड़ी अपेक्षाकृत भूमिका के बारे में बाजारों और निवेशकों को एक मजबूत संकेत प्रदान करना शामिल है।

वर्ल्ड बिजनेस काउंसिल फॉर सस्टेोनेबल डेवलपमेंट (डब्ल्यूबीसीएसडी) के जलवायु और ऊर्जा निदेशक, रस्मस वाल्काको ने कहा कि “बायोफ्यूचर प्लेटफॉर्म वैश्विक एजेंडा में जैव-ऊर्जा को वापस लाने के लिए बहुत जरूरी प्रयास का एक प्रमुख हिस्सा है”। “यह एक तंत्र है जहां सरकारें, निजी क्षेत्र और शिक्षाविद बहुत गतिशील रूप से सहयोग करने में सक्षम हैं”।

ब्राजील की सरकार द्वारा शुरू किया गया प्रयास है, जो अब बायोफ्यूचर प्लेटफॉर्म के अंतरिम सचिवालय के रूप में कार्य करता है, और इसके सदस्य देश अर्जेंटीना, ब्राजील, कनाडा, चीन, डेनमार्क, मिस्र, फिनलैंड, फ्रांस, भारत, इंडोनेशिया, इटली, मोरक्को, मोज़ाम्बिक, पैराग्वे, फिलीपींस, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और उरुग्वे हैं। प्लेटफार्म का उद्देश्य प्रमुख देशों, संगठनों, शिक्षाविदों और निजी क्षेत्र के बीच राजनीतिक वार्ता और सहयोग की सुविधा देना है, जो कि विकास में तेजी लाने और परिवहन, रसायन, प्लास्टिक और अन्य क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधन के स्थाहयी कम कार्बन विकल्प समाधान की तैनाती को विस्तारित करने की आवश्यकता से अवगत हैं। । ब्राजील की सरकार, अपने विदेश मंत्रालय के माध्यम से, वर्तमान में इस प्रयास की सुविधा प्रदान करती है।