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सभी के लिए सूक्ष्मदर्शी : डीबीटी द्वारा वंचित वर्ग के बच्चों के लिए फोल्डस्कोप

बायोटेक्नो लॉजी विभाग (डीबीटी), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने फोल्डस्कोाप इंस्ट्रू मेंट्स इंक और प्रकाश लैब (स्टेिनफोर्ड) की भागीदारी में स्कू्ली छात्रों, अध्यासपकों, वैज्ञानिकों और नागरिकों – वैज्ञानिकों तक पहुंच के लिए पूरे भारत में ओरीगेमी पेपर फोल्ड स्कोोप के उपयोग को समर्थन दिया है ताकि विज्ञान को लोकप्रिय बनाया जा सके और इसके बारे में उत्सु कता उत्पोन्नक की जा सके।DISuT2CVwAE8GTo

महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के स्कूेली अध्यापकों और छात्रों ने 28 और 29 अगस्त को मुंबई में एक अंत:क्रियात्ममक कार्यशाला में हिस्साे लिया जहां उन्हेंक डॉ. मनु प्रकाश द्वारा विकसित अल्पई लागत ओरिगेमी सूक्ष्ममदर्शी के माध्यसम से विज्ञान के चमत्काऔर दिखाए गए, वे स्टेरनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मैक आर्थर फाउंडेशन पुरस्कारर के विजेता रहे हैं।

बायोटेक्नोसलॉजी विभाग (डीबीटी), भारत सरकार और स्टेानफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए की प्रकाश लैब ने सितंबर 2015 में एक करार पर हस्ताकक्षर किए तथा स्टेानफोर्ड यूनिवर्सिटी में कार्यरत डॉ. मनु प्रकाश द्वारा विकसित फोल्डॉ स्कोरप को विज्ञान में उत्सुथकता बढ़ाने के लिए भारत लाने का प्रयास किया। डीबीटी और प्रकाश लैब के बीच इस समझौते के तहत पूरे भारत में ओरिगेमी पेपर माइक्रोस्कोिप को लोकप्रिय बनाने के लिए दिसंबर 2015 में अनेक कार्यशालाएं आयोजित की गई और इन्हेंक कॉलेज के छात्रों के बीच वितरित किया गया।

Dr K VijayRaghavan
डॉ. के विजयराघवन और डॉ. मनु प्रकाश ने धारावी, मुंबई में आयोजित कार्यशाला में छात्रों से बातचीत की।

धारावी की कार्यशालाओं और मुंबई के उर्दू नगर निगम स्कू्ल में संसाधन बहुत अधिक कमी वाली व्यावस्थाा में महानगर की स्थिति सामने आई, जिसमें उस उत्सातह पर प्रकाश डाला गया जिससे फोल्डो स्कोवप के जरिए विज्ञान की सूक्म्स् दर्शी दुनिया की खोज की जा सकती है, इससे खास तौर पर समाज के वंचित वर्गों के बच्चोंन को उत्सासहित किया जा सकता है।

डॉ. मनु प्रकाश ने कहा ‘अंतत: हमें बदलाव लाने वाले, धारावी के सामाजिक रूपांतरण के अतुलनीय सैनिकों के साथ काम करने का अवसर मिला, हम इन बच्चों को नमन करते हैं।’

छात्रों से बात करते हुए, डीबीटी के सचिव, डॉ. के विजयराघवन ने कहा ‘सूक्ष्म दर्शी दुनिया शानदार और रहस्यों से भरी हुई है, यह हमारे इतने नजदीक है और फिर भी छिपी हुई है। डॉ. मनु प्रकाश की बुद्धिमानी और सबको आकर्षित करने वाले उत्सा ह से आज हम सभी इस दुनिया को खोजने के लिए इस फोल्डन स्को्प का उपयोग कर पा रहे हैं।’ उन्होंनने कहा।

मुम्बई के नगर पालिका विद्यालय में फोल्डसस्कोोप कार्यशाला में भाग लेने वाली बालिकाएं

शबाना खातून शेख, कक्षा 8 की छात्रा है जिन्हों ने संघर्ष नगर के उर्दू स्कूल में विज्ञान विषय नहीं पढ़ें और उन्हेंस सूक्ष्म दर्शी के बारे में कुछ भी नहीं पता है, उन्होंने ने भी यह पेपर माइक्रोस्कोयप बहुत जल्दी तैयार कर लिया। वे विज्ञान के रहस्यों को देखने के लिए बहुत उत्सुजक थी। उन्होंने कहा ‘बड़ा बड़ा दिखा रहा है।’ मुंबई नगर निगम के स्कूलों और आईआईटी मुंबई में भी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। दिसंबर 2015 में दिल्ली और गुवाहाटी के कई कॉलेजों में कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने परियोजना विधि के माध्यलम से अध्याापकों, वैज्ञानिकों और नागरिक वैज्ञानिकों को फोल्डेस्कोधप के वितरण का एक प्रयास आरंभ किया। इस वर्ष पूरे भारत से विज्ञान विषय की समझ में सुधार लाने के लिए फोल्ड स्कोरप के उपयोग के लिए प्रस्ताषव आमंत्रित किए गए थे।

31 मई तक, जो प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि थी, पूरे भारत से इस अनुदान प्रतिस्पर्धा के लिए स्कू लों, कॉलेजों, नागरिक वैज्ञानिकों की ओर से कुल 525 आवेदन प्राप्तत हुए हैं, जिसमें फोल्डस्कोप तथा ओरिगेमी पेपर माइक्रोस्कोप के उपयोग के लिए एक लघु अनुदान दिया जाता है ताकि वैज्ञानिक विषयों में खोज की भावना को बढ़ावा दिया जा सके।

इन आवेदनों में से स्कूोलों से 112, कॉलेजों से 357 और वैयक्तिक वैज्ञानिकों से 56 आवेदन प्राप्ति हुए थे।

दिल्ली में एक कार्यशाला में फोल्डगस्को प का उपयोग करने वाले छात्र

इन चुने हुए आवेदकों ने कार्यक्रम के तहत छात्रों से बातचीत करने और विचारों के आदान प्रदान के लिए भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में कार्य किया। सफल प्रस्तानवों की सभी प्रस्ता वित गतिविधियां पूर्वोत्तर के स्कूतल या कॉलेज में दोहराई गई, इसी प्रकार शेष भारत के स्कूीलों और कॉलेजों में पूर्वोत्तर के सफल प्रस्ता वों को दोहराया गया।

इस अनुदान से पूर्वोत्तर भारत के साथ भारत के अन्य हिस्सोंष में एक प्रमुख दोहराव कार्यक्रम के जरिए विज्ञान पर एक बड़ा लोकतांत्रिक प्रभाव डाला जा सकता है। इस सूक्ष्मं अनुदान के जरिए, अल्‍प लागत कागज के फोल्डर स्कोाप भारत के दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं और वहां विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में मदद कर सकते हैं।

पूर्वोत्तर में सफल प्रस्तावों की गतिविधियों को दोहराव कार्यक्रम के माध्य्म से आयोजित करने के बाद इस कार्यक्रम को बहुत अधिक सफलता मिली क्यों कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत का जैव विविधता हॉटस्पॉ्ट है। यहां के वैज्ञानिक और छात्र इस सूक्ष्महदर्शी के साथ सूक्ष्मा जीवों की दुनिया को खोजने का अवसर अपनाते हुए इसका आनंद उठा सकते हैं और वे इसे अपने साथ हर जगह ले जा सकते हैं।

डीबीटी इस प्रकार की और भी कार्यशालाएं आयोजित करने तथा भारत के संसाधन की कमी वाले स्कूलों और कॉलेजों में 84000 फोल्डे स्कोप बांटने की इच्छुाक है। अंतत: आने वाले वर्षों में प्रत्ये क छात्र के पास स्कू ल किट के भाग के रूप में एक फोल्ड स्कोप जियोमेट्री बॉक्सछ होगा।