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मोनोजेनेटिक विकारों के संबंध में अवधारणा नोट/पूर्व-प्रस्ताेव आमंत्रण(अंतिम तिथि:30 अप्रैल, 2017)

विकसित और विकासशील दोनों देशों में मोनोजे‍नेटिक विकार नवजात मृत्यु दर का एक महत्वपूर्ण कारण है लाखो लोग चले आ रहे आनुवंशिक रोग से पीडि़त हैं और भारत में रहने वाली वैश्विक आबादी के छठे हिस्से का कभी योजनाबद्ध तरीके से अध्ययन नहीं किया गया है। यह न केवल भ्रूण नाश का महत्वलपूर्ण कारण हैं बल्कि यह माताओं और उनके परिवारों पर होने वाली प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ समय से पूर्व जन्मर, शिशु और वयस्क मृत्यु दर में भी महत्ववपूर्ण भूमिका निभाता है। वैश्विक सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि मोनोजेनिक विकारों की जन्म दर सामाजिक, जातीय, आर्थिक और पारिस्थितिक प्रभावों के अनुसार बदलता रहता है। विभिन्न मोनोजेनिक विकारों की शुरूआत को नियंत्रित करने के लिए (चयापचय विकारों, अंत:स्रावी विकारों, हीमोग्लोबिन विकारों और अन्य), इन विकारों के महामारी विज्ञान और आणविक आधार को समझना आवश्यिक है।

इस उद्देश्य के साथ, बायोटेक्नोलॉजी विभाग देश के विभिन्न क्षेत्रों अर्थात्‍ 1. पूर्वोत्तखर क्षेत्र, 2. पूर्वी क्षेत्र, 3. मध्यज क्षेत्र, 4. उत्तरी क्षेत्र, 5. उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, 6. पश्चिमी क्षेत्र, 7. दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र, 8. दक्षिणी क्षेत्र, 9. दक्षिण पूर्वी क्षेत्र और 10. अंडमान-निकोबार के अत्यवधिक प्रचलित मोनोजेनिक विकार के आणविक विश्लेषण के लिए नैदानिकों के साथ सहयोग इस अवधारणा नोट को प्रस्तुत करने के लिए इन क्षेत्रों में कार्यरत अन्वेाषकों को आमंत्रित करता है।

वित्तणपोषण की प्राथमिकता उन परियोजनाओं पर आधारित होगी जो किसी संबंधित क्षेत्र में अन्य मोनोजेनिक विकारों के समग्र प्रचलन की सूचीबद्धता सहित क्षेत्र विशेष में अत्यंधिक महत्वमपूर्ण वंशानुगत एकल-जीन विकार प्रचलन के आणविक तंत्र की बेहतर समझ के लिए नेतृत्वन प्रदान करेंगे। प्रत्येनक परियोजना को संबंधित क्षेत्र के सभी भागों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए।

निम्नलिखित अर्हता वाले उम्मी दवार आवेदन कर सकते हैं?

  • प्रस्तावित क्षेत्र में आवश्यमक सुविधाओं और सुदृढ़ वैज्ञानिक पृष्ठभूमि के साथ विश्वविद्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों/राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं/उद्योगों [वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान (डीएसआईआर) –मान्य्ता प्राप्त् अनुसंधान एवं विकास केंद्र] और गैर-लाभकारी संगठनों में कार्यरत वैज्ञानिक।
  • केवल नैदानिकविदों सहित सहयोग से चल रही परियोजनाओं पर वित्तपोषण के लिए विचार किया जाएगा।

चयन प्रक्रिया:

  • अवधारणा नोट की जांच प्रकल्पतना, क्रियान्वोयन दृष्टिकोण हेतु संगतता और क्षमता, अन्वेषक की पृष्ठभूमि और उनका/उनकी मौजूदा स्थिति में किए जा रहे गहन अनुसंधान की व्यवहार्यता पर आधारित होगी। हालांकि क्षेत्रगत अनुभव को महत्वण दिया जाएगा लेकिन सही प्रस्ता व के मामले में केवल इसे आधार नहीं माना जाएगा।
  • इस कार्यक्रम के लिए, अवधारणा नोट केवल अन्वेिषकों की पहचान में सहायक होगा (नैदानिकीविदों और वैज्ञानिकों दोनों) जो मोनोजेनिक विकारों के आणविक विश्लेषण में संगत विशेषज्ञता रखते हों। अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों उद्देश्यों के साथ स्पष्ट रूप से परिभाषित वैज्ञानिक दृष्टिकोणयुक्त चिन्हित लक्ष्य की दिशा में बहु-दृष्टिकोण, बहु-विषयक कार्यक्रम विकसित करने के लिए सभी चयनित प्रतिभागियों की नेटवर्किंग बैठक की सुविधा डीबीटी द्वारा उपलब्धं कराई जाएगी।

आवेदन प्रक्रिया:
मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास संस्थानों में कार्यरत इच्छुगक अन्वेरषक/वैज्ञानिक/निदान शोधकर्ता ईमेल vinita.chaudhary@nic के जरिए डॉ. विनीता एन. चौधरी, प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी, बायोटेक्नोलॉजी विभाग, नई दिल्ली को अवधारणा नोट/पूर्व-प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। अवधारणा नोट/ पूर्व प्रस्तावों के लिए आमंत्रण का शीर्षक ईमेल के विषय में लिखा होना चाहिए। यह विज्ञापन हिन्दी में भी उपलब्ध है।

आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि: 30 अप्रैल, 2017

नोट/पूर्व-प्रस्तारव आमंत्रण और प्रपत्र